राजनीति पर भाषण

परम आदरणीय प्राचार्य महोदय, शिक्षकगण और यहाँ उपस्थित सभी छोटे-बड़े भाइयों और बहनों को मेरा प्रणाम. आज मैं राजनीति विषय पर भाषण देने के लिए आप सभी के समक्ष खड़ा हूँ.

राजनीति शब्द से हम सभी अच्छी तरह से परिचित है क्योंकि हमारा देश एक लोकतांत्रिक देश है और यहाँ सरकार चलाने में राजनीति की एक अहम भूमिका है.

आये दिन हमारे देश या दुनिया में कोई न कोई चुनाव होता रहता है और हमें अक्सर राजनीति शब्द का इस्तेमाल देखने को मिलता है.

हर छोटे बड़े स्तर पर राजनीति देखने को मिलती है चाहे वो पंचायत स्तर के चुनाव हो या फिर लोकसभा जैसे बड़े चुनाव हो.

राजनीति की परिभाषा 

सबसे पहले हम राजनीति का अर्थ समझने की कोशिश करते है यह शब्द राज + नीति दो शब्दों से मिलकर बना है.

राज का मतलब होता है शासन करना और नीति का अर्थ होता है उचित कला या तरकीब. अरस्तु और प्लेटो के अनुसार हर वह चीज़ राजनीति है जो किसी समुदाय को प्रभावित करने से सम्बंधित होती है. राजनीति किसी भी समाज का महत्वपूर्ण और अविभाज्य अंग है.

राजनीति के लिए अलग-अलग लोगों के अलग-अलग तर्क हो सकते है. जब हम किसी राजनेता से राजनीति का अर्थ पूछते है तो वो बताते कि राजनीति एक प्रकार की समाज सेवा है.

भले ही चुनाव जीतने के बाद नेता समाज सेवा भूल कर सिर्फ अपनी सेवा में लगे रहते है. कुछ लोग राजनीति को समझौते की कला या दावपेंच बताते है.

राजनीति का महत्त्व 

एक समाज में अलग-अलग विचारो के लोग होते है और समाज को जीवित रहने के लिए राजनीतिक संगठन और सामूहिक निर्णय की आवश्यकता होती है.

जो समाज की सार्वजनिक समस्याओं जैसे पानी, बिजली, मकान पर विचार करे और समाज के हित में उचित निर्णय ले.

राजनीति समाज की विभिन्न समस्याओं को सुलझाने में मदद करती है और समाज को संगठित रूप से चलाने में सरकार बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. 

राजनीति केवल राजनीतिक पार्टियों या सरकार तक सीमित नहीं है साधारण लोगों के बीच में आपस में भी राजनीति हो सकती है.

जैसे हम सभी लोग मिलकर मौजूदा सरकार के कामकाज़ की परख  करते है और विचार विमर्श करते है कि अगली बार इस सरकार को चुने या फिर नहीं. यह भी राजनीति का एक छोटा सा प्रकार है. 

राजनीति केवल देश और राज्यों की राजनीतिक पार्टियों तक सीमित नहीं है बल्कि विद्यार्थी जीवन में भी राजनीति प्रवेश कर चुकी है.

देश में अलग-अलग कॉलेज और महाविद्यालय में छात्रों के बीच नेता के चुनाव का आयोजन होता है. इस छोटे स्तर के चुनाव में भी विभिन्न राजनीतिक दल होते है जो एक दूसरे के विरोध में चुनाव लड़ते है.

एक दल के छात्र नेता उम्मीदवार वोट लेने के लिए छात्रों के हित में विभिन्न कार्य करने के वादे करते है.

एक पार्टी दूसरी पार्टी को नीचा दिखाने की कोशिश भी करती है. छात्र जीवन में सकारात्मक सोच के साथ की गयी राजनीति युवाओ के विकास में अपना योगदान देती है. 

राजनीति के दुष्परिणाम

राजनेता जनता से वोट लेने के लिए जूठे वादे और दिलासे के साथ गलत प्रकार से राजनीति करते है और जीतने के बाद वो अपने फायदे के अनुसार काम करते है.

ऐसी राजनीति किसी भी देश के विकास में बहुत बड़ी बाधा बन सकती है. चुनाव के समय वो जनता से अपने विरोधी पार्टी के नेता से अधिक और बड़े वादे करने की कोशिश करते है और जीतने के बाद वो कभी उन वदो की तरफ ध्यान भी नहीं देते।

राजनेता अपने फायदे के लिए किसी भी प्रकार की गन्दी राजनीति का सहारा ले सकते है. कई सारे राजनीतिक दल तो सिर्फ धर्म के नाम पर बने हुए है और धर्म के नाम पर ही राजनीति करते है.

हमारे भारत जैसे देश में हर धर्म के लोग अपने धर्म को लेकर अधिक गंभीर रहते है वो अपने धर्म के खिलाफ कुछ भी सुनना पसंद नहीं करते है.

इसी का फायदा आजकल राजनीतिक पार्टियां उठाती है. वो धर्म के नाम पर लोगों को लड़ाने की कोशिश करते है और एक धर्म के लोगों के बीच दूसरे धर्म के लिए नफरत पैदा करते है. इसी के साथ राजनीतिक पार्टियां अपना फायदा देख कर वोट लेती है.

ऐसा कहा गया है कि राजनीति में आने के लिए अमीरी या गरीबी मायने नहीं रखती है कोई भी राजनीति में कदम रख सकता है उसके लिए आपकी पृष्ठभूमि राजनीति से जुड़ी हो यह भी मायने नहीं रखता लेकिन यह बात बिलकुल गलत होती प्रतीत हो रही है.

आज कल राजनीति में अपने आप को स्थापित करने के लिए व्यक्ति के पास धन होना अनिवार्य है. राजनीतिक दल अपना प्रचार करने के लिए भारी मात्रा में धन खर्च करते है जो किसी साधारण व्यक्ति के पहुँच से बाहर है.

छात्रों में भी राजनीति अब हिंसक रूप ले रही है. राजनीति के चलते छात्र संगठन आपस में हिंसा और लड़ाई-झगड़े करते है जो बिल्कुल भी सही पहलु नहीं है.

एक छात्र दल वोट के लिए दूसरे छात्र दल किसी भी हद तक गिराने की कोशिश करते है.

हमारे सामने आये दिन किसी न किसी नेता के द्वारा भ्रष्टाचार करने की खबरे आती रहती है जो देश की राजनीति के लिए बहुत बड़ा खतरा है.

इसके कारण लोगों के बीच राजनीति की छवि खराब होती जा रही है. हमारे देश में चुनाव लड़ने के लिए कोई भी निश्चित शैक्षणिक योग्यता नहीं है जिसके कारण राजनीति में ऐसे लोग आ जाते है जो बिलकुल भी कम पढ़े लिखे होते है.

कभी कभी तो ऐसा भी होता है कि जिसके पास शिक्षा के क्षेत्र में कोई उपलब्धि नहीं होती ऐसे लोग भी शिक्षा मंत्री बन जाते है. जो आगे चलकर देश के लिए बहुत बड़ा खतरा बन सकते है.

मेरा विचार है कि चुनाव में खड़े होने के लिए कोई उचित शैक्षणिक मापदण्ड और उम्र का दायरा निश्चित होना चाहिए.

जैसे विभिन्न सरकारी नौकरियों के लिए न्यूनतम और अधिकतम आयु सीमा निर्धारित होती है उसी प्रकार राजनीति में यह सीमा होनी चाहिए ताकि अधिक से अधिक युवाओं को भी राजनीति में आने का मौका मिले.

अंतिम शब्द 

अंत में मैं अपने भाषण की समाप्ति के साथ यह कहना चाहूंगा कि आज के समय में हमारा ज्यादा से ज्यादा समाज शिक्षित होता जा रहा है.

ऐसे में हमे सबसे पहले मानवता को समझते हुए कभी भी धर्म के ऊपर हो रही राजनीति को बढ़ावा नहीं देना चाहिए.

गर आप किसी राजनीतिक दल का समर्थन करना चाहते है तो उसके काम और विचारों को ध्यान में रखते हुए समर्थन करें.

वोट हमेशा उसी को दे जो झूठे वादे नहीं बल्कि काम करे. अगर आपको ऐसा लगता है कि कोई भी नेता आपके लिए उचित नहीं है तो आप नोटा पर वोट दे सकते है.

आपका एक वोट भी सत्ता पलटने की ताकत रखता है. इसी के साथ मैं अपने भाषण को यहीं समाप्त करता हूँ. धन्यवाद आपका दिन शुभ हो. 

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