मित्र की आवश्यकता पर निबंध 

मनुष्य के जीवन में माता-पिता, भाई-बहन और परिवार के अलावा एक सच्चा मित्र बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. मित्र हमारे जीवन में आने वाली चुनौतियों और बाधाओं से लड़ते हुए आगे बढ़ने में हमेशा हमारा साथ देता है. जीवन की हर बड़ी से बड़ी परेशानी भी छोटी लगने लगती है जब एक सच्चा मित्र हमारा हर कदम पर साथ देता है. जब हम अपने परिवार से दूर होते है तो एक मित्र ही परिवार के सदस्य का स्थान ले सकता है.

हमारे परिवार में माता-पिता, दादा-दादी, भाई-बहन और चाचा-चाची के साथ हमारा खून का रिश्ता होता है और ये रिश्ता हमारे जन्म के साथ बन जाता है लेकिन मित्र का रिश्ता हम खुद बनाते है. इसलिए मित्रता का रिश्ता खून का रिश्ता नहीं होते हुए भी हमारे लिए बहुत ही जरुरी होता है. इस लेख में मित्र की आवश्यकता पर निबंध लिखा गया है जो सभी विद्यार्थियों के लिए उपयोगी है.

मित्र की आवश्यकता पर निबंध

मित्र की आवश्यकता पर निबंध

मित्रता जीवन का वो जरुरी अंग है जो हमारे जीवन के हर पल को आनन्दमय बना देता है. सच्चा मित्र हमसे भावनात्मक रूप से जुड़ा होता है वो ख़ुशी के अवसर पर हमारे साथ शामिल होता है और दुःख में हमें सहारा देता है. जब भी हम कोई गलती कर रहे होते हैं तो हमारा मित्र उस गलती के बारे में हमें अवगत करता है और उस गलती को सुधारने में भी हमारी सहायता करता है.

सच्चे दोस्त के साथ हम अपनी हर बात को शेयर कर सकते है और वो भी हमारे साथ हर बात शेयर करता है. अक्सर ये अनुभव किया जाता है कि हम जब भी अकेले कोई सफर तय करते है तो बोर हो जाते है और सफर भी बहुत लम्बा लगने लगता है लेकिन वहीं जब सफर में हमारा मित्र हमारे साथ होता है तो लम्बे से लम्बा सफर बातें करते हुए कब ख़त्म हो जाता है पता ही नहीं चलता.

ये जरुरी नहीं कि मित्रता हमेशा दो इंसानों के बीच में हो बल्कि सच्ची मित्रता एक इंसान और जानवर के बीच भी हो सकती है या दो जानवरों के बीच भी सच्ची मित्रता हो सकती है. दोस्ती का सम्बन्ध सीधा दिल से जुड़ा होता है और उसके लिए किसी भाषा या विशेष शरीर की आवश्यकता नहीं होती है.  

स्कूल में मित्र की आवश्यकता 

जब हम बहुत छोटे होते है तो हमारे माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्य हमेशा हमारे साथ रहते है लेकिन थोड़े बड़े होने के बाद जब स्कूल जाने लगते है तो हमें परिवार से दूर होना पड़ता है. माता-पिता को भी काम पर जाना होता है ऐसे में हम अपने स्कूल में एक मित्र बनाते है जो हमें परिवार की कमी को महसूस नहीं होने देता है.

स्कूल में जब हमे किसी सवाल को हल करने में दिक्कत होती है तो हमारा मित्र हमारी सहायता करता है. स्कूल में मित्र के साथ हम खाना खाते है और स्कूल की विभिन्न गतिविधियों में हिस्सा लेने के लिए हमारा सच्चा मित्र हमारा हौसला बढ़ाता है. जब हमारे किसी टेस्ट में कम अंक आते है तो हमारा मित्र पढाई में अपना ध्यान केंद्रित करने की सलाह देता है.   

कॉलेज में मित्र की आवश्यकता 

जब हम स्कूल से पास होने के बाद कॉलेज में दाखिला लेते है तो हमारे सामने एक नई चुनौती होती है. स्कूल के सारे दोस्त हमसे बिछड़ जाते है और कॉलेज में सभी हमारे लिए नए होते है. कॉलेज में हमे नए मित्र बनाने की आवश्यकता होती है ताकि हमारा मन लग जाए.

बहुत सारे लोग हॉस्टल में भी रहते है वहाँ दोस्तों के साथ रहकर अपने जीवन के निर्णय खुद लेना सीखते है. अपनी समस्याओं को दोस्तों के साथ शेयर करते है और उनकी राय लेते है. कॉलेज में हमारा सच्चा मित्र हमें सही निर्णय लेने और आगे बढ़ने में मदद करता है.

वृद्धावस्था में मित्र की आवश्यकता 

वृद्धावस्था में भी अच्छे मित्र बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है ये जीवन का वो पड़ाव होता है जब व्यक्ति शारीरिक रूप से कमजोर होने लगता है और बहुत कुछ खोने लगते है. ऐसे में व्यक्ति अपने आप को अकेला महसूस करने लगता है लेकिन जब एक सच्चा मित्र उसके साथ होता है तो ऐसा मुश्किल समय भी हँसते-हँसते कट जाता है.

अक्सर बुजुर्ग व्यक्ति अपने दोस्तों के साथ पार्क में बैठे दिखाई देते है. वो अपने परिवार से ज्यादा अपने दोस्तों के साथ समय बिताना पसंद करते है. वो अपनी दैनिक समस्याएँ अपने हमउम्र दोस्तों के साथ शेयर करते है ताकि उनका मन हल्का हो जाए.

पति-पत्नि का रिश्ता ऐसा रिश्ता होता है जिसकी तुलना किसी से नहीं की जा सकती है. ये रिश्ता समय के साथ और भी गहरा होता जाता है. वृद्धावस्था में पति और पत्नी का रिश्ता दोस्ती का रूप ले लेता है दोनों एक दूसरे का बहुत ध्यान रखते है और अपनी हर बात एक दूसरे के साथ शेयर करते है.   

जीवन में मित्र का महत्त्व 

एक व्यक्ति के जीवन में अलग-अलग पड़ाव आते है बचपन से जवानी आती है और जवानी से बुढ़ापा आता है इस दौरान नए-नए दोस्त बनते है लेकिन दोस्ती का महत्त्व कभी नहीं बदलता है. धीरे-धीरे सच्चे दोस्त का महत्त्व समझ में आने लगता है. दोस्त हमे गलती करने पर एक गुरु की तरह डाँटता भी है और अच्छा काम करने पर पीठ भी थपथपाता है.

मित्र के बिना जीवन का हर सफर सुना लगने लगता है. प्राचीन काल से ही मित्रता को बहुत महत्त्व दिया गया है और इसके कई उदहारण मौजूद है जैसे श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता, भगवान श्री राम और सुग्रीव की मित्रता, दुर्योधन और कर्ण की मित्रता, माता सीता और त्रिजटा की मित्रता, अकबर और बीरबल की मित्रता आज भी समाज को बहुत महत्वपूर्ण सन्देश देती है.

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निष्कर्ष –  मित्रता सबसे सुन्दर और पवित्र रिश्ता होता है दोस्त जितना एक दूसरे के साथ रहते है दोस्ती उतनी ही गहरी होती जाती है. मित्रता व्यक्ति के सम्पूर्ण विकास में भी मदद करती है इसलिए हर व्यक्ति के जीवन में मित्र होना आवश्यक है जिसके साथ वो अपनी हर बात को शेयर कर सके.

अकेलापन व्यक्ति के मन में नकारात्मक विचार पैदा कर सकता है लेकिन अगर सच्चे दोस्त के साथ रहेगा तो ऐसे विचारों से हमेशा दूर रहेगा और हमेशा मन में सकारात्मक विचार ही आएंगे जो जीवन में आगे बढ़ने में मदद करेंगे.  

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