पुस्तकालय पर निबंध

पुस्तके मनुष्य की सबसे अच्छी मित्र होती है वो हर परिस्थिति में मनुष्य का साथ देती है. आज भले ही इंटरनेट का जमाना है और सारी जानकारी इंटरनेट पर मौजूद है लेकिन आज भी पुस्तकों का मनुष्य के जीवन में उतना ही महत्व है जितना पहले था.

बिल गेट्स जैसे बड़े से बड़े व्यक्ति आज भी किताबें पढ़ने में रूचि रखते है और लोगों को भी यही सलाह देते है. सभी प्रकार की किताबें, पत्रिका, समाचार पत्र, उपन्यास और किसी भी प्रकार की पुस्तकें हम पुस्तकालय से आसानी से प्राप्त कर सकते है.

पुस्तकालय का निर्माण करने का उद्देश्य यह है कि आम व्यक्ति जो सभी प्रकार की पुस्तकें खरीदने में सक्षम नहीं है वो पुस्तकालय में जाकर किताबें पढ़ सकता है.

हर देश में बड़े-बड़े सार्वजनिक पुस्तकालय बने हुए है ताकि वहाँ का आम नागरिक अपनी पसंदीदा पुस्तकें बिना ख़रीदे भी पढ़ सके.

इस लेख में पुस्तकालय विषय पर निबंध लिखा गया है इस विषय अक्सर छोटी-बड़ी कक्षा के विद्यार्थियों को निबंध लिखने को कहा जाता है.

पुस्तकालय पर निबंध (Library Essay In Hindi)

Library Essay In Hindi

पुस्तकालय शब्द ‘पुस्तक’ और ‘आलय’ दो शब्दों से मिलकर बना है जिसका अर्थ उस स्थान से है जहाँ विभिन्न प्रकार की पुस्तकों का संग्रह किया जाता है और किताबें पढ़ने के लिए उनको खरीदने की आवश्यकता नहीं होती.

कोई भी पुस्तकालय में बैठकर पुस्तकों को पढ़ सकता है. अब ये सवाल भी हमारे मन में आता है कि सभी प्रकार की पुस्तकें तो पुस्तकों की दुकान पर भी होती है क्या उन्हें भी पुस्तकालय कहा जा सकता है? जवाब है नहीं! दुकानों में पुस्तकें व्यापार के उद्देश्य से रखी जाती है वहाँ से केवल किताबे खरीद सकते है. 

पुस्तकालय निर्माण की परंपरा प्राचीन काल से प्रचलित रही है इसके साक्ष्य भी इतिहास के पन्नों में मौजूद है. भारत के सबसे प्राचीन विश्वविद्यालय जैसे तक्षशिला, नालंदा, विक्रमशिला जैसे विश्वविद्यालयों में पुस्तकों को संगृहीत करने के लिए पुस्तकालय का निर्माण किया गया था.

मुग़ल शासन काल के दौरान भी शिक्षा को बहुत महत्त्व दिया जाता था और कोकई शासको ने पुस्तकालयों का निर्माण भी करवाया. 

भारत के कलकत्ता शहर में बनी नेशनल लाइब्रेरी ऑफ़ इंडिया भारत का सबसे बड़ा पुस्तकालय है. जिसकी स्थापना 1 फरवरी 1953 में कलकत्ता के कुछ पुस्तकालयों के समावेश से हुई थी.

इस पुस्तकालय में 22 लाख से भी ज्यादा विभिन्न प्रकार की पुस्तकों का संग्रह किया गया है. वही दुनिया के सबसे बड़े पुस्तकालय की बात करे तो संयुक्त राज्य अमेरिका के वाशिंगटन में स्थित द लाइब्रेरी ऑफ़ कांग्रेस सबसे बड़ी है. इस पुस्तकालय में जिसमे 179 मिलियन सामग्रियों का संग्रह मौजूद है.

पुस्तकालय के प्रकार 

पुस्तकालयों की आवश्यकता और कार्य के अनुसार विभिन्न प्रकार के पुस्तकालयों का निर्माण किया गया है. इन पुस्तकालयों का निर्माण देश के अलग-अलग क्षेत्रों में मौजूद है.

सभी प्रकार के पुस्तकालयों का मुख्य उद्देश्य है लोगों को सभी प्रकार की पुस्तकें एक ही छत के नीचे उपलब्ध करवाना.

  1. शैक्षिक पुस्तकालय- इस प्रकार के पुस्तकालय विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों जैसे स्कूल, कॉलेज या विश्वविद्यालय में मौजूद होते है जो केवल छात्रों और शिक्षकों के लिए ही बने होते है. ऐसे पुस्तकालयों में ज्यादातर छात्रों के पाठ्यक्रम से संबंधित सामग्री होती है.     
  2. सार्वजनिक पुस्तकालय- जैसा कि नाम से ही समझ आ रहा है कि ऐसे पुस्तकालय सार्वजनिक उद्देश्य से बनाये जाते है. ऐसे पुस्तकालय का उपयोग आम नागरिक भी कर सकता है. यह किसी भी देश के नागरिकों की शिक्षा और ज्ञान के लिए बहुत उपयोगी है.
  3. राष्ट्रीय पुस्तकालय – राष्ट्रीय पुस्तकालय का उद्देश्य किसी भी राष्ट्र की बहुमूल्य कृतियों का संग्रह करना है. यह सरकारी कोष से संचालित होता है. 
  4. विशेष पुस्तकालय – इस प्रकार के पुस्तकालय किसी विशेष प्रकार के लोगों के समूह के लिए बने होते है जैसे किसी रिसर्च आर्गेनाईजेशन के कर्मचारियों के लिए या किसी सरकारी संस्था के विशेष कर्मचारियों के लिए हो सकते है.

पुस्तकालय का महत्त्व   

पुस्तकालय को शिक्षा की आत्मा और ह्रदय के समान माना जाता है यह जीवन में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. पुस्तकालय में शांति और अनुशासन का वातावरण होता है जो पढ़ाई में ध्यान केंद्रित करने में बहुत उपयोगी होता है.

यह व्यक्ति के जीवन से अज्ञानता के अंधकार को दूर करके ज्ञान रूपी प्रकाश भरता है. गरीब से गरीब विद्यार्थी भी बहुत कम शुल्क या फिर निशुल्क किसी भी महान से महान लेखक के द्वारा  लिखित पुस्तक को बिना खरीदे पढ़ सकते है.

पुस्तकालय में इतिहास, बायोग्राफी, कहानियाँ, कविताएं, उपन्यास, विज्ञान जैसी सभी प्रकार की किताबों की श्रेणी के लिए अलग-अलग खंड होते है जिनकी मदद से कोई भी अपनी रूचि के अनुसार आसानी से पुस्तक ढूंढ सकता है.

यह भी अनुभव किया गया है कि इतिहास के महत्वपूर्ण ग्रंथो के संरक्षण के लिए पुस्तकालय सबसे अच्छा विकल्प है.

कई लोगों के लिए पुस्तकालय आय का भी मुख्य साधन है. छोटे शहरों में बहुत कम सार्वजनिक पुस्तकालय है जिसके कारण बहुत से लोग इसका उपयोग नहीं कर पाते है.

ऐसे में कई लोग अपने आस पास प्राइवेट पुस्तकालय खोलकर लोगों की मदद करते है और अपनी आय भी करते है. पुस्तकालय का महत्त्व छात्रों और शिक्षकों दोनों के लिए समान रूप से उपयोगी है.

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निष्कर्ष

21वीं सदी को इंटरनेट का युग कहा जाता है और आज के समय में हर प्रकार की जानकारी इंटरनेट पर मौजूद है.

दुनिया के ज्यादातर लोगों तक इंटरनेट भी पहुंच चुका है लेकिन अभी भी किताबों का उतना ही महत्व है जितना पहले था और यह कभी समाप्त नहीं हो सकता.

किताबें लोगों की सोचने की छमता को भी बढ़ाती है और पुस्तकालय से बेहतर किताबे पढ़ने की जगह कही नहीं है. अगर आप भी किताबें नहीं पढ़ते है या फिर पुस्तकालय का उपयोग नहीं करते है.

तो एक बार पुस्तकालय में बैठकर पढ़ाई करके देखें, इससे बेहतर पढ़ाई के अनुकूल वातावरण कहीं पर नहीं होता. पुस्तकालय की अलमारी में रखी किताबें हमारे दिमाग और आँखों को शांति पहुँचाती है और पढाई में रूचि भी बढाती है.   

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