Essay on women in Hindi

Essay on women in Hindi

प्राचीन काल से ही समाज के विकास में शिक्षा का बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान रहा है. शिक्षा में इतनी ताकत होती है कि वो किसी भी व्यक्ति के जीवन को बदल सकती है.

शिक्षा के कारण ही एक गरीब मुस्लिम लड़का हमारे देश का राष्ट्रपति बना. शिक्षा ने आज मनुष्य को चाँद तक पहुँचाया है बिना शिक्षा के ये बिलकुल भी मुमकिन नहीं था.

शिक्षा पुरुष और महिला दोनों के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण है. हमारे देश में पुरुषों और महिलाओं के ऐसे कई उदाहरण है जिनके जीवन को सफल बनाने में शिक्षा की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका रही.

नारी पर निबन्ध (Essay on Women in Hindi)

Essay on women
Essay on women in Hindi

नारी शिक्षा देश के लिए एक चुनौती भरा विषय रहा है क्योंकि समाज में महिलाओं की शिक्षा को बहुत कम महत्व दिया जाता है. लोगो की यही धारणा रही है.

कि लड़किया पढ़ लिख कर भी क्या कर लेगी क्योंकि आगे चलकर तो उन्हें घर के ही काम करने है और परिवार को संभालना है. इसी सोच को बदलने के नारी शिक्षा को बढ़वा देना बहुत ही आवश्यक है.

इस लेख में नारी शिक्षा पर निबंध लिखा गया है इस विषय पर अक्सर विद्यार्थियों को निबंध लिखने को कहा जाता है. 

भारत में नारी शिक्षा का इतिहास 

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भारत ऐसा देश है जहाँ प्राचीन समय से महिलाओं को समाज में अलग स्थान दिया गया है. वैदिक काल के अनुसार महिलाओं को एक देवी के रूप में पूजा जाता था शिक्षा और ज्ञान की देवी सरस्वती भी एक महिला का ही रूप है.

वैदिक काल में ऐसी कई महिलाओं के उदाहरण मौजूद है जिन्होंने वैदिक शिक्षा ग्रहण की. ब्रिटिश काल में भी नारी शिक्षा को महत्व दिया जाने लगा और स्कूलों का निर्माण भी हुआ.

वर्ष 1821 में तमिलनाडु के तिरुनेलवेली में प्रथम आल गर्ल्स बोर्डिंग विद्यालय स्थापित किया गया.

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पश्चिमी भारत में ज्योतिबा फुले और उनकी पत्नी सावित्रीबाई फुले ने महिला शिक्षा के विकास में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

1848 में उन्होंने पुणे में पहले गर्ल्स स्कूल की स्थापना की थी और दो वर्षो में इस विद्यालय में 8000 से भी अधिक लड़कियों का दाखिला हुआ.

वर्ष 1879 में भारत में एशिया के सबसे पुराने महिला बेथ्यून कॉलेज की स्थापना हुई. इन प्रयासों से भारत में महिला साक्षरता दर में भी बढ़त देखने को मिली.

आजादी के बाद महिला साक्षरता दर को बढ़ाने के लिए कई उपयोगी कदम उठाये गए. 1958 में सरकार ने महिला शिक्षा के लिए एक अलग समिति का गठन किया और फिर महिलाओं और पुरुषों के लिए समान पाठ्यक्रम लागू करने की योजना बनाई गयी.

1968 में सरकार के द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति की सिफारिश हुई. इन महत्वपूर्ण कदमों से ही महिलाओं की शिक्षा के आंकड़ो में सकारात्मक सुधार हुए.

नारी शिक्षा का महत्व और आवश्यकता   

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किसी भी समाज के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए पुरुषों और महिलाओं दोनों की बराबर भूमिका होती है. दोनों को मिलजुल कर एक साथ चलने की आवश्यकता है अगर एक भी अंग पीछे रहता है तो विकास संभव नहीं है.

इसलिए जितना पुरुष साक्षरता का महत्व है उतना ही महिला साक्षरता का भी महत्व है. इससे समाज में बाल विवाह, दहेज़ प्रथा, कन्या भ्रूण हत्या और अन्य अपराधों को समाज से ख़त्म किया जा सकता है.

हमारे देश में बच्चों के पोषण की स्थिति भी अच्छी नहीं है और यह मुद्दा भी महिला शिक्षा से किसी न किसी प्रकार से जुड़ा हुआ है.

शिक्षित माँ अपने बच्चे के पालन-पोषण को लेकर अधिक सतर्क रहती है. देश की अर्थव्यवस्था में शिक्षित महिला महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है जिससे देश के विकास की गति भी बढ़ेगी.

नारी शिक्षा में सरकार का योगदान 

हमारे देश में महिला साक्षरता को बढ़ाने के लिए सरकार के द्वारा उठाये गए महत्वपूर्ण कदमों को नजरंदाज नहीं किया जा सकता. सरकार ने समय समय पर ऐसे अभियान चलाये जिसके कारण नारी शिक्षा की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ है.

महिलाओं को लेकर सरकार का सबसे महत्वपूर्ण अभियान है ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान जिसकी शुरुआत वर्ष 2015 में महिला और बाल विकास मंत्रालय, मानव संसाधन विकास मंत्रालय और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने मिलकर की थी.

सरकार के द्वारा लड़कियों को मुफ्त शिक्षा, पोषण, किताबें, स्कूल में शौचालय निर्माण, विद्यालय में लड़कियों की संख्या को बढ़ने जैसे महत्वपूर्ण कदम उठाए गए.

इससे पहले भी सरकार ने महिला शिक्षा के लिए 2004 में कम साक्षरता वाले क्षेत्रों में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय योजना के तहत कई आवासीय विद्यालयों का निर्माण किया था.

बालिकाओं को शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने के लिए कई राज्य सरकारें और प्रदेश सरकारें साइकिल, लैपटॉप और स्कूटी भी वितरण करती है.

नारी शिक्षा में बाधाएं 

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महिलाओं की शिक्षाओं को लेकर समाज में कई बाधाएं उत्पन्न होती रही है और आज भी कई बाधाएं आती है जिसके कारण कई लड़कियाँ अपने सपने को अंदर ही अंदर मार देती है. महिलाओं को लेकर समाज की यह सोच बिलकुल भी गलत है.

कई महिलाएं ऐसी होती है जो ऐसी बाधाओं से लड़कर आगे बढ़ती है और फिर वो महिलाओं के लिए उदाहरण के तौर पर पेश की जाती है.

महिलाओं की शिक्षा में उनकी सुरक्षा को लेकर भी बाधाएं आती रही है कई माता-पिता अपनी बेटी की सुरक्षा के डर से भी उसे अच्छी शिक्षा के लिए घर से दूर भेजने पर संकोच महसूस करते है.

इसे भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि आए दिन महिलाओं के साथ आपराधिक मामले बढ़ते जा रहे है. सरकार को महिलाओं की सुरक्षा पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है.

वैसे तो लोगों के द्वारा लैंगिक समानता की बड़ी बड़ी ढींगे हाकी जाती है लेकीन अभी भी देश में लैंगिक असमानता का आंकड़ा चिंताजनक है.

हमारे समाज में अभी भी पुरुषों को महिलाओं से अधिक महत्त्व जाता है. लड़कियों को अभी भी शिक्षा की बजाय घर के काम सिखाने पर जोर दिया जाता है. यह भी नारी शिक्षा में एक बाधा है.        

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निष्कर्ष

Essay on women in Hindi

नारी शिक्षा और सुरक्षा पर अक्सर बड़ी-बड़ी बाते होते है लेकिन जमीनी स्तर पर अभी और ध्यान देने की आवश्यकता है. गाँवों में अभी भी लड़कियों को शिक्षा देने पर इतना ध्यान नहीं दिया जाता, राजस्थान और मध्यप्रदेश जैसे राज्यों में अभी भी लड़कियों की बहुत कम उम्र में शादी कर दी जाती है.

और उनके ऊपर परिवार की जिम्मेदारियों का बोझ डाल दिया जाता है. महिलाओं को लेकर समाज की सोच को बदलने की आवश्यकता है. हर माँ बाप को यह अहसास होना जरूरी है कि बेटियों की शिक्षा उनके विवाह की जिम्मेदारी से भी ज्यादा महत्वपूर्ण है. हमें भी अपने आस पास के लोगो को नारी शिक्षा को लेकर जागरूक करने की आवश्यकता है.   

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