रक्षाबंधन पर निबंध

रक्षाबंधन भारत देश के सबसे पवित्र त्यौहारों में से एक है. यह त्यौहार भाई – बहन के पवित्र रिश्ते के प्रतिक के रूप में हर वर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है.

वैसे तो यह हिन्दू और जैन धर्म का मुख्य त्यौहार है लेकिन देश के सभी धर्मो के लोग इस त्यौहार को ख़ुशी के साथ मनाते है. हर धर्म के त्यौहार को एकता के साथ मिलकर मनाना और सभी की खुशी में शामिल होना यही भारतीय लोगो की सबसे बड़ी विशेषता है.

रक्षाबंधन पर निबंध (Essay on Raksha Bandhan in Hindi)

Essay on Raksha Bandhan in Hindi

रक्षाबंधन बंधन का अर्थ होता है रक्षा का बंधन मतलब की एक बहन अपने भाई को राखी बांधती है और बदले में भाई अपनी बहन को हर परिस्थिति में रक्षा करने का वचन देता है. 

                                         “रक्षाबंधन का त्योहार है

                                      हर तरफ खुशियों की बौछार है

                                    और बंधा एक रेशम की डोरी में

                                         भाई-बहन का प्यार है ” 

रक्षाबंधन का इतिहास और पौराणिक कहानियाँ 

हमारे देश में हर त्यौहार मनाने के पीछे कोई न कोई उद्देश्य और पौराणिक कहानी जरूर होती है. रक्षाबंधन के पीछे भी कई हिन्दू पौराणिक कहानियाँ है.

ऐसा माना जाता है कि रक्षाबंधन का इतिहास हजारों साल पुराना है. एक बार जब देवताओ और दानवों के बीच भयंकर युद्ध हुआ था और दानव बहुत हावी हो रहे थे तब देवताओ के राजा भगवान इन्द्र घबराते हुए बृहस्पति के पास गए और उनसे सलाह मांगी.

बृहस्पति ने इन्द्र को रक्षा विधान करने को कहा. इंद्र ने रक्षा विधान किया और उनकी पत्नि इन्द्राणी ने उनके दाहिने हाथ में श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन रक्षा सूत्र बांधा. इंद्र अपनी सेना को लेकर फिर से असुरो के साथ युद्ध लड़ने गए और युद्ध में विजय होकर लौटे.

इन्द्रदेव ने युद्ध जीतने का पूरा श्रेय उस रक्षा के सूत्र को दिया और इस पावन त्यौहार को मनाया जाने लगा.

रक्षाबंधन की एक कहानी महाभारत से भी जुड़ी है जब भरी सभा में भगवान श्री कृष्ण ने शिशुपाल का अपने सुदर्शन चक्र से वध किया था तब उनकी ऊँगली से खून बहने लगे.

यह देख द्रौपदी ने अपनी साड़ी का पल्लू फाड़ा और कृष्ण की ऊँगली पर बाँध दिया. भगवान श्री कृष्ण ने द्रोपदी को अपनी बहन मानते हुए सदैव उनकी रक्षा करने का वचन दिया.

एक कहानी असुरो के सम्राट बलि से जुड़ी है. बलि ने अपनी भक्ति से विष्णु को प्रसन्न कर दिया. असुरराज बलि की भक्ति से प्रसन्न होकर उन्होंने बलि से वरदान मांगने को कहा.

बलि ने भगवान विष्णु से उसके साथ पाताल लोक में रहकर महल की पहरेदारी करने का वचन मांग लिया. इस वरदान की वजह से सभी देवी देवता और देवी लक्ष्मी चिंतित हो गए.

भगवान विष्णु को बलि के वहाँ से वापस लाने के लिए माता लक्ष्मी ने एक गरीब स्त्री का रूप धारण किया और असुर राज बलि को राखी बाँधी.

माता लक्ष्मी ने भगवान विष्णु को वापस ले जाने का वचन माँगा. उस दिन भी श्रावण मास की पूर्णिमा का दिन था.

रक्षाबंधन की एक कहानी मुग़ल काल से भी जुड़ी हुई है एक बार जब बहादुर शाह अपनी सेना को लेकर चित्तोड़ पर आक्रमण करने आ रहा था तब मेवाड़ की रानी कर्मवती ने अपने राज्य की रक्षा के लिए मुग़ल बादशाह हुमायूँ को राखी भेजी और रक्षा करने की मांग की.

बादशाह हुमायूँ  ने रानी कर्मवती के साथ मिलकर  बहादुरशाह के खिलाफ युद्ध लड़ा और चित्तोड़ की रक्षा की.

रक्षाबंधन कैसे मनाया जाता है? 

रक्षाबंधन के इस पावन त्यौहार को मनाने के लिए कई दिनों पहले से ही तैयारियाँ शुरू हो जाती है और बाजारों में रौनक दिखने लगती है. लोगो की चहल पहल बढ़ जाती है.

राखियों की खरीददारी के लिए नई नई दुकानें लगती है और कई प्रकार की छोटी बड़ी राखियाँ दुकानों पर दिखाई देने लगती है. मिठाइयों की दुकाने भी भिन्न भिन्न मिठाइयों से सजी हुई दिखाई देने लगती है. रक्षाबंधन के दिन सभी बहने अपने भाई के यहाँ जाती है.

भाई – बहन एक दूसरे को राखी बांधते है, पूजा करते है और मिठाई खिलाते है. सभी भाई अपनी बहनों को उनकी रक्षा करने का वचन देते है. 

इस शुभ दिन पर हमारे देश की बहने देश के जवानों को राखियाँ बांधती है. भारतीय सेना के जवान देश की सभी महिलाओं और देश की रक्षा करने का वचन देते है.

सरकार इस दिन सभी महिलाओं के लिए निशुल्क बस में यात्रा करने का एलान करती है ताकि गरीब से गरीब भाई बहन ख़ुशी और बिना किसी समस्या के रक्षाबंधन का त्यौहार मना सके.

रक्षाबंधन का महत्त्व        

राखी का यह त्यौहार बहुत ही धार्मिक और सामाजिक त्यौहार है. यह त्यौहार दो परिवार को एक साथ जोड़ता है और खुशियाँ लाता है. भाई बहन के बीच मतभेद दूर होते है और प्रेम बढ़ता है.

केवल भाई बहन ही नहीं बल्कि कोई भी एक दूसरे को राखी बाँधकर खुशियाँ बाँट सकते है. भाई बहन किसी भी कारण से एक दूसरे से दूर रहते है लेकिन राखी का त्यौहार मनाने के लिए अपने सारे कामकाज छोड़कर साल में एक बार जरूर मिलते है.

राखी के त्यौहार का महत्त्व समझते हुए भारतीय डाक विभाग भी इस दिन बहनों को अपने भाइयों को राखी भेजने के लिए डाक सेवा का बहुत कम शुल्क लेते है.

यह त्यौहार गरीब और अमीर दोनों के लिए समान रूप से खुशियाँ लेकर आता है. 

उपसंहार

राखी का कच्चा धागा भी एक भाई को उसकी बहन की हर परिस्थिति में रक्षा करने की ताकत देता है. हमारे समाज में आये दिन महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार होने जैसी घटनाये घट रही है.

ऐसे में हमारा कर्तव्य बनता है कि हम महिलाओं की रक्षा के लिए लड़े चाहे वो किसी की भी बहन या बेटी क्यों न हो.

रक्षाबंधन के अवसर पर हर भाई को अपनी बहन को किसी भी महिला की रक्षा और इज्ज़त करने का वचन देना है. ताकि हमारी बहन ही नहीं बल्कि हर घर की बेटी बिना किसी भी भय और डर के शांति से रह सके.    

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