परोपकार पर निबन्ध

आज के समय में हर कोई धन कमाने और उसको इकट्ठा करने में लगा हुआ है ऐसे लोग अक्सर अपने और अपने परिवार के बारे में सोचते है. लेकिन दुनिया में ऐसे बहुत से लोग है जो मानवता के बारे में विचार करते है.

और अपने धन, समय और बल से बिना किसी स्वार्थ के जरूरतमंदों की मदद करते है. दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों में गिने जाने वाले बिल गेट्स और वारेन बफेट भी बहुत परोपकारी व्यक्तित्व के धनी है. वो अपनी सम्पति में से कुछ हिस्सा लोगों के सेवा के में दान करते है.   

परोपकार करना मनुष्य का सबसे बड़ा धर्म होना चाहिए क्योंकि पूरे संसार में ईश्वर ने केवल मनुष्य को ही सबसे गुणवान और शक्तिशाली बनाया है.

वो किसी भी कठिन से कठिन काम का हल निकल सकता है. हमारे देश में  मदर टेरेसा और महात्मा गांधी जैसे कई प्रेरणा स्रोत है जिन्होंने अपने जीवन का ज्यादातर समय परोपकार में व्यतीत किया.

इस लेख में परोपकार पर निबंध लिखा गया है यह सभी कक्षा के विद्यार्थियों के लिए उपयोगी है.

परोपकार पर निबन्ध (Essay on Philanthropy in Hindi)

Essay on Philanthropy in Hindi

दुनिया में अपने स्वार्थ के लिए तो कोई भी काम करते है लेकिन जो अपने स्वार्थ को भूलकर दूसरों के लिए काम करे वो परोपकारी होता है. परोपकार शब्द ‘पर’+‘उपकार’ दो शब्दों से मिलकर बना है.

जिसका अर्थ है दूसरों की भलाई करना या उनकी भलाई के काम में अपना निस्वार्थ योगदान देना है. इंसान गरीब हो या अमीर हो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, किसी भी प्रकार से वो परोपकार कर सकता है.

परोपकार का सबसे बड़ा पाठ तो हमारी प्रकृति हमें सिखाती है वो निस्वार्थ मनुष्य और जीव-जंतुओं की हर जरुरत को पूरा करती है. प्रकृति हमें मुफ्त में हवा, पानी, फल, फूल, वनस्पति सब कुछ उपलब्ध कराती है. 

इसी प्रकार कुछ लोग ऐसे होते है जिनको दूसरे असहाय और गरीब लोगों या जानवरों की आर्थिक और सामाजिक रूप से मदद करने में ख़ुशी का अनुभव होता है.

भारतीय समाज में प्राचीन काल से लोगों को परोपकार करने का ज्ञान दिया जाता है. हमारे परिवार में भी जब हम छोटे थे तब हमारे माता पिता और शिक्षक यही ज्ञान देते आ रहे है कि हमें हमेशा बिना किसी स्वार्थ के जरूरतमंद लोगों की मदद करनी चाहिए.   

परोपकार का महत्त्व

दूसरे लोगों के जीवन को बेहतर बनाना किसी भी समाज के लिए बहुत बड़ा तोहफा है. दुनिया का बहुत बड़ा तबका गरीबी और भुखमरी से जूझ रहा है.

ऐसे लोगों को एक वक्त का खाना भी नसीब नहीं होता. ऐसे लोगों के लिए कोई रोटी, कपड़ा और रहने के लिए छत की व्यवस्था करे इससे बड़ी बात और क्या हो सकती है.

लोगों की मदद करने के लिए किसी बड़ी संस्था से जुड़ने या ज्यादा धन दान करने की भी आवश्यकता नहीं है. लोग अपने आसपास में किसी भी गरीब व्यक्ति या जानवर को देखे तो उसकी भी मदद कर सकते है.

परोपकारी व्यक्ति कभी जगह और धन नहीं देखता उसका मकसद किसी न किसी प्रकार से जीवों की मदद करना होता है.

परोपकार का यह मतलब बिल्कुल भी नहीं है कि अगर आपके आस पास कोई बीमार और लाचार है लेकिन आप उसकी मदद नहीं कर रहे हो और केवल दिखावे के लिए बड़ी संस्थाओं में दान कर रहे हो.

ऐसे में आप परोपकार का महत्व नहीं समझ रहे. परोपकार के लिए व्यक्ति का हृदय और मन दोनों ही निस्वार्थ होने चाहिए.

इंसान अपने और अपने परिवार के लिए कितना भी धन कमा ले और बड़े-बड़े घर और गाड़िया खरीद ले लेकिन वो कभी खुशी नहीं खरीद सकता.

इंसान को वास्तविकता में अंदर से खुशी का अनुभव तभी होगा जब वो किसी गरीब और असहाय की मदद करेगा. गरीब लोगों की दुआ में बहुत ताकत होती है.

बहुत से लोग महिलाओं के हित में काम करने वाली संस्थाओं में दान करते है जो लैंगिक समानता को बढ़ावा देती है. ऐसे लोगों की वजह से ही आज महिलाएँ समाज में अपनी पहचान बना रही है और पुरुषों के साथ कन्धे से कन्धा मिलाकर आगे बढ़ रही है.

परोपकारी लोगों की वजह से रंग, जाति, धर्म, गरीबी हर प्रकार के भेदभाव के प्रति लोगो की सोच बदल रही है. 

धार्मिक रूप से परोपकार      

दान और परोपकार को बढ़ावा देने में विभिन्न धर्मो ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. हमारे देश में लोग अपने धर्म के प्रति अत्यधिक सक्रिय रहते है.

अपने धर्म के लिए वो कुछ भी करने को तैयार रहते है. कई लोग मिलकर धर्म के माध्यम से लोगो की सेवा के उद्देश्य से संस्थानों की स्थापना करते है. हिन्दू धर्म में भी लोगों ने कई गौशाला, अनाथालय जैसी संस्थाएं बनायीं हुई है.

सिख धर्म के लोग गुरूद्वारे में लंगर का आयोजन करते है जिसमे कोई भी सेवा प्रदान करके परोपकार कर सकता है. हर धर्म के लोग किसी न किसी प्रकार से संगठन बना कर गरीब और जरूरतमंद लोगों की मदद करने का प्रयास कर रहे है.

धार्मिक रूप से परोपकार में लोग बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते है जो समाज के लिए एक सकारात्मक सन्देश है.

सामान्य व्यक्ति भी कर सकता है परोपकार

परोपकार करने के लिए किसी भी व्यक्ति का धनवान होना बिल्कुल भी आवश्यक पहलू नहीं है. परोपकार के लिए व्यक्ति की अंदर से भावना और विचार होना चाहिए और सबसे बड़ा कथन तो ये है कि परोपकार की शुरुआत अपने घर से होती है.

अगर हमारे घर पर माँ, पिताजी या दादी कोई भी बीमार हो और हम उनकी देखभाल और मदद करने की बजाय बड़े संस्थानों में धन दान कर रहे है तो यह किसी भी प्रकार से परोपकार नहीं माना जा सकता.

एक सामान्य व्यक्ति अपने आस पास के जरूरतमंद और असहाय लोगों की अपने स्तर पर मदद कर सकता है. वह जानवरों को चारा डाल सकता है, उनके लिए पानी का इंतजाम कर सकता है. बीमार व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने में मदद करना भी परोपकार ही है.

बड़े स्तर पर असहाय लोगो की मदद करने के लिए तो बहुत लोग है लेकिन जब कोई छोटे स्तर पर गरीब लोगों की मदद करता है तो लोग उन्हें आशीर्वाद देते है उनके लिए  दुआएं करते है.

इन्हें भी पढ़े

निष्कर्ष

परोपकार दुनिया का सबसे महान कार्य कहा जा सकता है और यह हर व्यक्ति के बस की बात नहीं है. परोपकार करने के लिए व्यक्ति के अंदर धैर्य और दान की भावना होनी चाहिए. अगर कोई व्यक्ति सक्षम है तो उसको निश्चित रूप से परोपकार की ओर ध्यान देना चाहिए. आप भी किसी न किसी प्रकार से परोपकार के भागी बन सकते है.     


Leave a Comment