लॉकडाउन पर निबंध

कोरोना नाम की महामारी ने पूरी दुनिया में कहर बरसाया है लाखों लोगो ने इस बीमारी से अपनी जान गंवाई. इस महामारी से लड़ने के लिए  पूरी दुनिया में लॉकडाउन का इस्तेमाल किया ताकि कोरोना की इस कड़ी को तोड़ा जा सके. लॉकडाउन का उपयोग करना फायदेमंद रहा है और तेजी से फैल रही इस महामारी को कम करने में सफल रहे लेकिन इसके अलावा लॉकडाउन के कारण लोगों को बहुत सारी परेशानियों का सामना भी करना पड़ा.

लॉकडाउन ने हमें अपने धैर्य के साथ महामारी के खिलाफ लड़ना सिखाया है. सरकार ने समय-समय पर इस महामारी से लड़ने और घर पर सुरक्षित रहने के लिए दिशा निर्देश दिए. ऐसे लोग जो सक्षम थे उन्होंने एक साथ मिलकर गरीब और जरूरतमंद  लोगों की मदद भी की. 

इस लेख में लॉकडाउन पर निबंध लिखा गया है जो सभी कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए उपयोगी है.

लॉकडाउन पर निबंध (Essay on Lockdown in Hindi)

Essay on Lockdown in Hindi

लॉकडाउन एक प्रकार का आपातकालीन प्रोटोकॉल है जिसके तहत सभी लोगों के बाहर निकलने पर पाबंदी लगाई जाती है. बहुत आवश्यक सेवाओं को ही चालू रखा जाता है इस प्रकार की पूर्ण पाबंदी का पूरे विश्व में कोरोना महामारी के दौरान पहली बार इस्तेमाल किया गया ताकि कोरोना के तेजी से फ़ैल रहे संक्रमण को रोका जा सके और इस बीमारी के इलाज के लिए दवा का आविष्कार करने की योजना बनाई जा सके. 

अगर कोई भी व्यक्ति कोरोना प्रोटोकॉल का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाती है फिर चाहे वो देश का आम नागरिक हो या फिर देश का बड़े से बड़ा व्यक्ति क्यों न हो. भारत में 24 मार्च 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित करते हुए 21 दिनों के सम्पूर्ण लॉकडाउन की घोषणा की जिसकी अवधि बाद में धीरे-धीरे बढ़ाई गई.    

पूरे देश की जनता ने सरकार के इस कदम का स्वागत करते हुए प्रशासन का सहयोग किया. सरकार ने गरीब मजदूरों के लिए मुफ्त राशन की घोषणा की ताकि देश का कोई भी नागरिक भूखा न सोए. लॉकडाउन प्रोटोकॉल का उपयोग विश्व के ज्यादातर देशों ने किया और बहुत हद तक कोरोना पर काबू पाने में भी सफल रहे.

लॉकडाउन के लाभ     

लॉकडाउन के फायदों को देखते हुए ही इस प्रोटोकॉल का इस्तेमाल किया गया क्योंकि कोरोना महामारी से लड़ने के लिए इसके अलावा कोई और रास्ता नहीं था. लॉकडाउन के सभी नियमों का जिम्मेदारी से पालन करके इस महामारी पर आसानी से काबू किया जा सकता है. घर पर रहने से हम अपने परिवार को इस बीमारी से सुरक्षित रख सकते है.

सकारात्मक दृष्टिकोण से लॉकडाउन ने कई लोगों को अपने परिवार के साथ समय बिताने का मौका दिया. परिवार के सदस्यों ने एक दूसरे के दुखदर्द को समझा और इसके कारण परिवार के बीच मनमुटाव ख़त्म हुए. लोगों ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर अपनी प्रतिभा दिखाई और दुनिया के कौने कौने तक पहुँचाया.

कई लोगों ने इस आपदा को अवसर में बदलते हुए इंटरनेट के माध्यम से पैसे कमाना सीखा और बिज़नेस शुरू किया. कई बड़े-बड़े अभिनेता और व्यवसायी मानवता के महत्त्व को समझते हुए लोगो की मदद करने के लिए आगे आए. लोगों ने किसी न किसी माध्यम से गरीब लोगों की मदद की ताकि हर व्यक्ति को भोजन मिल सके.

देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने पीएम केयर फंड की स्थापना की और सभी देशवासियों से अपनी क्षमता के अनुसार पैसे दान करने का अनुरोध किया. कोरोना महामारी की इस चैन को तोड़ने के लिए अलग-अलग योजना बनाई और उनको लागु की.

देश की विभिन्न संस्थाओं ने कोरोना के टीके की खोज के लिए प्रशिक्षण किये और कोरोना के टीके का आविष्कार किया. टीकाकरण का अभियान शुरू किया गया और आयु के अनुसार टीके लगाए गए. जल्द ही सभी लोगों का टीकाकरण संपन्न हो जायेगा. 

लॉकडाउन लगने से सभी प्रकार की परिवहन सेवाएं बंद कर दी गयी जिसके कारण सड़क और रेल दुर्घटना में भी भारी गिरावट देखने को मिली और प्रदूषण भी कम हुआ. आपराधिक मामलों में कमी हुई जो समाज के लिए बहुत अच्छा संदेश है.   

लॉकडाउन की हानियाँ 

लॉकडाउन का उपयोग इस महामारी के खिलाफ फायदेमंद तो रहा लेकिन कई लोगों को नकारात्मक रूप से भी प्रभावित किया. ज्यादातर गरीब वर्ग के लोगों को बहुत सी समस्याओं का सामना करना पड़ा. लॉकडाउन की घोषणा के बाद कई गरीब मजदूर पैदल ही अपने गाँव की ओर पैदल ही पलायन करने लगे जिसके कारण कई लोगों को अपनी जान भी गंवानी पड़ी.

लॉकडाउन के कारण लोगों को अपना व्यापार, कारखाने और दुकाने बंद करनी पड़ी जिसके कारण कई लोगों की नौकरियां चली गयी. बेरोजगारी में भारी बढ़ोत्तरी हुई और देश की अर्थव्यवस्था में भी गिरावट देखने को मिली. ऐसा सिर्फ भारत के साथ ही नहीं हुआ बल्कि और भी बहुत से देशों को इसी प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ा.

शादी समारोह और विभिन्न कार्यक्रमों पर रोक लगाई गई जिसके कारण टेन्ट, बेंड और हलवाई जैसे कई व्यापारियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा. गरीब लोगों को काम नहीं मिलने से उन्हें परिवार के साथ भोजन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा.

स्कूल, कॉलेज और विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के बंद होने से विद्यार्थियों और शिक्षकों को पढ़ाई में बहुत सी बाधाओं का सामना करना पड़ा. बच्चों को ऑनलाइन क्लासें दी गयी लेकिन कक्षा कक्ष और ऑनलाइन पढ़ाई में बहुत बड़ा अंतर होता है. बच्चों की परीक्षाएं भी रद्द की गयी और बिना परीक्षा के ही सभी को पास कर दिया जो बिल्कुल भी सही तरीका नहीं है. 

इन्हें भी पढ़े

निष्कर्ष

लॉकडाउन को लोगों को सुरक्षित घर पर रखने के लिए इस्तेमाल किया गया लेकिन लोग फिर भी लापरवाही दिखाते रहे. ऐसे लोग जो बिना काम घर से बाहर निकलते उनके खिलाफ प्रशासन ने सख्त कदम उठाये. चिकित्सा विभाग की टीम गाँव और शहर के हर घर में जाकर लोगों की जांच करती रही. ऐसी आपातकालीन स्थिति में सभी लोगों को एक साथ मिलकर प्रशासन और सरकार का साथ देना चाहिए यह हर नागरिक की जिम्मेदारी है. 

देश में इस भयंकर महामारी में भी सेवा कर रहे चिकित्सा विभाग और पुलिस प्रशासन के इस काम के लिए उनका आभार व्यक्त करना चाहिए. सरकार ने भी ऐसे कर्मचारी जो जरुरी सेवाओं से जुड़े है उनके लिए वित्तीय सहायता की घोषणा भी की. ऐसे कर्मचारियों ने देश को बहुत बड़ी एकता और मानवता का सन्देश दिया.