किसान की आत्मकथा पर निबंध

भारत एक कृषि प्रधान देश है यहाँ की जनसंख्या का एक बड़ा भाग कृषि पर निर्भर है और देश की अर्थव्यवस्था में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है इसी लिए कृषि को देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी कहा जाता है. यहाँ खेती के प्रति किसानों का अलग ही जुनून है. हम जो भोजन या पकवान खाते है वो किसान की ही देन है इसलिए किसान को अन्नदाता भी कहा जाता है. किसान अपने खेत में दिन रात कठिन परिश्रम करता है और अनाज पैदा करता है.

किसान खेतों में अलग-अलग प्रकार की फसलें उगाता है जो सभी प्रकार की खाने की सामग्री बनाने के उपयोग में आती है. किसान सारी उम्र मेहनत करके देश के सभी लोगों का पेट भरता है फिर भी सारी उम्र वो गरीब ही रहता है. इस लेख में किसान की आत्मकथा पर निबंध लिखा गया है जिसमे एक किसान के जीवन में होने वाली घटनाओं को दर्शाने का प्रयास किया है.

किसान की आत्मकथा पर निबंध (Essay On Autobiography Of Farmer In Hindi) 

Essay On Autobiography Of Farmer In Hindi

मैं भारत का एक किसान हूँ और दिन रात अपने खेत में काम कर सभी के लिए अनाज उगाता हूँ. मैं सुबह जल्दी उठ कर अपने खेत पर काम करने चला जाता हूँ और शाम को सूरज ढलने के बाद घर लौटता हूँ. मुझे अपने खेत से बहुत लगाव है इसलिए मैं अपने बच्चे की तरह खेत की देखरेख करता हूँ. 

मैं प्रतिदिन अपने खेत में कठोर परिश्रम करता हूँ लेकिन इन कठिन परिस्थितियों में भी मैं अपने छोटे से परिवार के साथ छोटी छोटी खुशियाँ ढूंढने की कोशिश करता हूँ. खेती से मैं बचपन से जुड़ा हुआ हूँ और हमारी पूरी पीढ़ी खेती पर ही निर्भर रही है.

मैं बचपन से ही खेती में अपने पिताजी का हाथ बटाता था और उन्ही से खेती करना सीखा. पिताजी ने स्कूल में भी दाखिला करवाया लेकिन पैसों के अभाव के कारण मेने अपनी पढाई बीच में ही छोड़ दी और खेती करने लग गया. पिताजी बचपन में यही कहते थे कि पढ़ लिख कर बड़ा अधिकारी बनना खेती में कुछ नहीं रखा है लेकिन आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण यह सपना अधूरा रह गया.

मुझे गर्व है कि मैं एक किसान हूँ और लोगों की सबसे बड़ी जरुरत भोजन के लिए जिम्मेदार हूँ. मैं अपने इस जीवन से संतुष्ट हूँ लेकिन अपने बच्चों को पढ़ा लिखा कर अधिकारी बनाना चाहता हूँ क्योंकि खेती में बहुत कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है. कभी मौसम की मार से फसल खराब हो जाती है तो कभी फसल की सही कीमत नहीं मिलती.

किसान का खेत  

मेरे गाँव में ज्यादातर लोग खेती करते है और ज्यादातर किसानों के पास खुद की जमीन है लेकिन मैं उन किसानों में हूँ जिनके पास खुद की जमीन बहुत कम है. जमीन कम होने के कारण में कभी-कभी दूसरे किसानों के खेत में अपनी फसल उगाता हूँ और फिर अंत में फसल का बंटवारा करते है. 

मेरा एक छोटा सा खेत है जिसके चारों ओर तारबंदी करवाई हुई है ताकि नीलगाय और दूसरे मवेशी जानवरों से फसल की रक्षा की जा सके. खेती की सिंचाई करने के लिए मेरे खेत के नजदीक ही मेने एक कुआं खुदवाया हुआ है जिसमें से मोटर पम्प की मदद से पानी निकालकर खेत की सिंचाई करता हूँ.

मेरे खेत के आसपास और भी खेत है जिनमे भी कुएँ से ही सिंचाई की जाती है. मेरा गाँव राजस्थान में होने के कारण यहाँ बारिश कम होती है और जमीन का जलस्तर भी बहुत गहरा है. जल की कमी के कारण कभी-कभी खेत को खाली भी रखना पड़ता है. मुझे अपने खेत की मिट्टी से बहुत प्यार है और मैं अपना ज्यादातर समय खेत पर ही व्यतीत करता हूँ.     

किसान के खेत में फसल 

सभी किसान ऋतू के अनुसार अपने खेत में रबी, खरीफ और जायद फसल उगाते है. बारिश होने के बाद खरीफ की फसल बोई जाती है मक्का, सोयाबीन, उड़द, मुंग, मूंगफली, धान, ज्वार, बाजरा, गन्ना आदि महत्वपूर्ण खरीफ फसलें है. अक्टूबर और नवंबर महीने में रबी की फसलें बोई जाती है सरसों, गेहूँ, जौ, चना, मसूर, मटर, आलू आदि महत्वपूर्ण रबी की फसलें बोई जाती है.

हम अपने खेत में ज्यादातर सोयाबीन, मक्का, मूंगफली, चना, गेहूं, सरसों, कपास जैसी फसलें उगाते है जो हमारे खेत में अच्छी उपज देती है और मेरे खेत की मिट्टी भी इन फसलों के अनुकूल है. अनाज के अलावा मैं अपने खेत में सब्जी भी उगाता हूँ जिनका उपयोग हम अपने घर पर सब्जी बनाने में करते है ताकि हमें सब्जी खरीदने के लिए बाजार में नहीं जाना पड़े. 

किसान की समस्याएँ   

किसान का जीवन बहुत सारी कठिनाइयों से भरा हुआ है देश के ज्यादातर किसान गरीबी और कर्ज में डूबे हुए है. किसानों पर अधिक कर्ज होने के कारण अक्सर किसान की आत्महत्या के मामले भी सुनने को मिलते है. फसल बौने और खेत को तैयार करने के लिए मुझे बहुत सी बार कर्ज लेना पड़ता है.

प्राकृतिक आपदाओं और मौसम की वजह से बहुत सी बार हमारी फसल खराब हो जाती है. फसल ख़राब होने से मैं बहुत दुखी और परेशान हो जाता हूँ मुझे अपने परिवार के बारे में चिंता होने लगती है. मंडी में भी मेरी फसल का उचित दाम नहीं मिलता. मैं अपनी फसल की अपने बच्चे की तरह देखरेख करता हूँ और इसे पकाता हूँ लेकिन अंत में मंडी में इसे बेचते समय मैं सिर्फ देखता रह जाता हूँ और खरीददार इसकी मनचाही कीमत देता है.

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निष्कर्ष

किसान एक देवता के समान है वो देश के हर परिवार में अनाज उपलब्ध कराता है. किसान का सम्मान करना बहुत जरूरी है किसान को गरीबी से बाहर निकालने के लिए सरकार को प्रयत्न करने की जरूरत है. इस देश का हर व्यक्ति जो किसी न किसी वस्तु का उत्पादन करता है उसके पास अपने सामान का मूल्य निर्धारित करने का अधिकार होता है लेकिन किसान के पास अपनी फसल का मूल्य तय करने का अधिकार भी नहीं होता इसी वजह से आज बहुत से किसान गरीबी के बोझ तले दबे हुए है.

सरकार को किसान के कर्ज माफ़ी के लिए योजनाएँ बनानी चाहिए ताकि कर्ज के कारण किसान आत्महत्या करने का कभी विचार नहीं करें. अगर देश का किसान खुश है तो समझो पूरा देश खुश है. 


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