कोरोना काल में शिक्षा और छात्रों पर निबंध लेखन

कोरोना महामारी ने लोगों को स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से ही प्रभावित नहीं किया बल्कि आर्थिक और मानसिक रूप से भी बहुत अधिक प्रभावित किया है. इस महामारी के दौरान कई लोगो को अपनी नौकरी गंवानी पड़ी जिसके परिणामस्वरूप उनको अपने परिवार का पालन पोषण करने में भी बहुत सी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. इस महामारी से वो देश बहुत अधिक प्रभावित हुए जो निम्न और मध्यम-निम्न आय वाले देश है यहाँ की अर्थव्यस्था में बहुत भारी गिरावट देखने को मिली.

देश में सम्पूर्ण लॉकडाउन लगने से स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी को बंद रखा गया जिसके कारण छात्र जीवन बहुत प्रभावित हुआ. छात्रों को पढाई में बहुत सी समस्याओं का सामना करना पड़ा और इस दौरान शिक्षा प्रणाली में असमानता और अधिक बढ़ी है. इस लेख में कोरोना काल में शिक्षा और छात्रों पर विषय पर निबंध लिखा गया है जो सभी कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण है.

कोरोना काल में शिक्षा और छात्रों पर निबंध लेखन

coronavirus kal me siksha aur chhatro par nibandh

कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया में अपना कहर बरसाया बड़ी-बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश भी इस महामारी के सामने घुटने टेकने पर मजबूर हो गए. किसी का व्यापर घाटे में चला गया तो किसी की नौकरी चली गयी. शिक्षा के क्षेत्र में कोरोना काल में बहुत ही बड़ा प्रभाव पड़ा. केवल छात्रों को ही नहीं बल्कि शिक्षकों को भी बहुत सारी परेशानियों का सामना करना पड़ा. दसवीं, बाहरवीं, मेडिकल, इंजीनियरिंग और कई सरकारी भर्ती परीक्षाओ को भी रद्द किया गया जिसके कारण छात्रों की मानसिकता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा.

ऑफलाइन कोचिंग संस्थान, स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय बंद होने के बाद ऑनलाइन शिक्षा व्यवस्था में तेजी से उछाल देखने को मिला. बहुत से ऐसे शिक्षण संस्थान थे जो कभी ऑनलाइन शिक्षा व्यवस्था से परिचित नहीं थे उन्होंने भी ऑनलाइन शिक्षा में कदम रखा और बहुत तेजी के साथ अपने आप को स्थापित करने में सफलता भी हासिल की.

भारत सरकार ने कई तकनिकी संस्थानों के साथ मिलकर ऑनलाइन शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए स्वयं, दीक्षा, इ-पाठशाला जैसे कई सारे पोर्टल विकसित किये ताकि एक गरीब छात्र भी आसानी से घर बैठे शिक्षा प्राप्त कर सके. यूट्यूब जैसे वीडियो शेयरिंग प्लेटफार्म पर भी बहुत सारे शिक्षकों ने फ्री में बच्चों को पढ़ाना शुरू ताकि छात्रों की शिक्षा पर इस कोरोना के प्रभाव को कम किया जा सके.

कोरोना काल में शिक्षा और छात्रों पर प्रभाव

शिक्षा एक अच्छे व्यक्तित्व निर्माण करने के लिए बहुत ही आवश्यक है कोरोना महामारी में लॉकडाउन के कारण छात्रों की शिक्षा पर नकारात्मक असर देखने को मिला है. स्कूल या कॉलेज नहीं जाने पर पढाई से दूर होते दिखाई दिए. समय की मांग के अनुसार शिक्षा ने ऑनलाइन रूप तो लिया लेकिन ग्रामीण इलाकों में रहने वाले बच्चे संसाधनों के अभाव के कारण ऑनलाइन शिक्षा से दूर ही रहे है.

इस प्रकार अचानक से शिक्षा को ऑनलाइन रूप देना वास्तविक ऑनलाइन शिक्षा नहीं कहा जा सकता बल्कि इस प्रकार की  शिक्षा को आपातकालीन ऑनलाइन शिक्षा कहना बेहतर होगा. क्योंकि इसके लिए पहले कोई अनुसंधान नहीं किया गया और बच्चों बिना किसी तैयारी के ऑनलाइन शिक्षा को अपनाना पड़ा.

ऑनलाइन शिक्षा कितनी भी गुणवत्ता पूर्ण क्यों न हो लेकिन ये कभी भी क्लास रूम से प्राप्त होने वाली शिक्षा का स्थान नहीं ले सकती. बच्चो का रोजाना सुबह जल्दी उठना और स्कूल में जाकर पढाई शुरू करने से पहले प्रार्थना और विभिन्न गतिविधियां करना ये सभी छात्रों के सर्वांगीण विकास के बहुत ही आवश्यक है.

आज भी गाँवों में रहने वाले ऐसे बहुत से छात्र है जिसके पास मोबाइल और इंटरनेट की सुविधा नहीं है और परिवार की स्थिति भी इतनी अच्छी नहीं है कि उनको पढाई करने के लिए मोबाइल फ़ोन दिला सके ऐसे में शिक्षा में अमीर और गरीब बच्चों के बीच ये बहुत बड़ी असमानता देखने को मिली. 

बच्चें ऑनलाइन क्लास लेने के बाद खुद अभ्यास करने की बजाय अपना अधिकतर समय मोबाइल पर गेम खेलते है या सोशल मीडिया मीडिया का इस्तेमाल करते है. घर पर बच्चों को शिक्षक का डर नहीं होता इसलिए वो अपनी मनमानी करते है. इस कारण उनकी मानसिकता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है और वो पढाई से दूर होते जा रहे है.

कोरोना महामारी में लॉकडाउन के कारण स्कूल बंद होने और परीक्षा रद्द होने से 10वीं और 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों पर इसका बहुत ही नकारात्मक असर हुआ. बच्चों ने अच्छे अंक लाने के लिए पूरे साल जमकर पढाई की ताकि वो आगे अपने पसंदीदा कॉलेज या यूनिवर्सिटी में दाखिला लेकर अपना करियर अच्छे से स्थापित कर सके लेकिन परीक्षा रद्द होने के कारण उनकी करियर पर भी असर हुआ है.

देश के अलग-अलग क्षेत्रो मे बहुत कम लडकियां है जिनके पास मोबाइल और इंटरनेट की सुविधा है ऐसे में यह लड़कियों और लड़कों के बीच असमानता उत्पन्न कर रहा है. इस वजह से ग्रामीण इलाके में रहने वाली लड़कियों का शिक्षा का स्तर और गिर सकता है और बाल विवाह जैसे अपराध बढ़ने की सम्भावना है.

ऐसे छात्र जो अपना घर परिवार छोड़ कर बड़े शहरों में पढाई के लिए गए थे और किराये पर रह रहे थे उनको अपने रहने और खाने का खर्च उठाने में बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा. जिसके कारण छात्रों  की मानसिकता पर भी प्रभाव पड़ा.

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निष्कर्ष

कोरोना काल में शिक्षा को लेकर छात्र, शिक्षक और अभिभावक सबके लिए एक चुनौतीपूर्ण समय रहा. वो शिक्षक जो कभी ऑनलाइन शिक्षा से परिचित नहीं थे उनको भी बिना किसी पूर्व तैयारी के ऑनलाइन शिक्षा में कदम रखना पड़ा. 

बहुत से शिक्षक तो ऐसे थे जिसके पास बच्चों को ऑनलाइन पढ़ने के सभी संसाधन उपलब्ध नहीं थे फिर भी उन्होंने बच्चों को पढ़ाना जारी रखा. लॉकडाउन खुलने के बाद धीरे-धीरे व्यापार, मंदिर, परिवहन सब खुलने लगे लेकिन स्कूल और कॉलेज उसके बाद भी बंद है इसलिए अभिभावकों को भी अपने बच्चे के भविष्य को लेकर चिंता होने लगी है.    

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