कैरम बोर्ड पर निबंध

कैरम बोर्ड एक ऐसा खेल है जो बच्चे, बूढ़े और महिलये सबका पसंदीदा खेल है.इस खेल को सीखना और खेलना बहुत ही आसान है खेल की सबसे अच्छी विशेषता यह है कि इसको खेलने के लिए मैदान की आवश्यकता नहीं होती.

अपने घर के एक छोटे से कोने में बैठकर भी खेल को अपने परिवार या दोस्तों के साथ खेलकर मनोरंजन कर सकते है.कैरम का खेल केवल मनोरंजन के दृष्टिकोण से ही खेला जाता है यह खिलाड़ी के स्वास्थ्य के लिए बिलकुल भी महत्वपूर्ण नहीं है.  

कैरम पर निबंध (Carrom Essay in Hindi)

Carrom Essay in Hindi

इस लेख में कैरम बोर्ड के खेल पर निबंध (Carrom Essay in Hind) जो आपको कैरम बोर्ड का इतिहास,कैरम कैसे खेलते है,कैरम खेल के महत्वपूर्ण उपकरण,कैरम बोर्ड खेलने के नियम से जुड़ी जानकारी देगा. 

कैरम बोर्ड का इतिहास

कैरम के इस खेल का इतिहास ज्यादा पुराना नहीं है विकिपीडिया में दी गयी जानकारी के अनुसार कैरम खेल की उत्पत्ति भारत में ही हुई.1914 से 1918 के बीच जब पहला विश्व युद्ध हुआ था तभी कैरम लोगो के बीच लोकप्रिय  था और कैरम की प्रतियोगिताओ का भी आयोजन होता था.सन 1935 के आसपास यह खेल भारत के पड़ौसी देश श्रीलंका में खेला जाने लगा लेकिन 1988 के आसपास  इस खेल का अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तेज़ी से विकास हुआ और राष्ट्रिय तथा अंतराष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिताएं होने लगी.

कैरम कैसे खेलते है?

कैरम का खेल खेलना बहुत आसान है इस खेल को खेलने के लिए कम से कम दो और अधिकतम चार खिलाड़ियों की आवश्यकता होती है. अगर चार खिलाड़ी है तो वो आपस में दो-दो की टीम बना सकते है या फिर अकेले आपस में खेल सकते है.एक वर्गाकार बोर्ड के अंदर सफ़ेद और काले रंग की गोटियाँ रखी जाती है इनके अलावा एक लाल रंग की रानी गोटी होती है.

एक टीम के खिलाड़ी एक दूसरे के आमने सामने बैठते है.प्रत्येक खिलाड़ी को बारी-बारी से गोटी को स्ट्राइकर से मार कर कैरम बोर्ड के चारो कोनो पर बने पॉकेट में डालना होता है और ज्यादा से ज्यादा गोटिया जीतकर विरोधी टीम से ज्यादा अंक अर्जित करने होते है.

कैरम खेल के महत्वपूर्ण उपकरण

कैरम बोर्ड – यह वर्गाकार आकार का लकड़ी का बोर्ड होता है.कैरम बोर्ड की सतह चिकनी होती है जो गोटियों को फिसलने में मददगार होती है.बोर्ड के चारो ओर लकड़ी की सीमा बनाई जाती है जो गोटियोंऔर स्ट्राइकर को बाहर गिरने से बचाती है. कैरम बोर्ड की सतह पर ही गोटियो को रखा जाता है और खेल खेला जाता है.

गोटिया – इस खेल में 9 काली और 9 सफ़ेद वर्ताकार  गोटिया होती है जो इस खेल का अहम् हिस्सा होती है. इन गोटियों को स्ट्राइकर से मार कर बोर्ड के चारो कोनो में बनी पॉकेट में डालना होता है.

स्ट्राइकर – स्ट्राइकर एक वृताकार आकार की गोटी होती है जिसको कैरम बोर्ड पर रख कर सफ़ेद या काली गोटियों के निशाना लगाया जाता है.स्ट्राइकर का सामान्यतः 15 ग्राम होता है.

रानी – सफ़ेद और काली गोटियों के आलावा एक लाल रंग की वृताकार गोटी होती है जिसे रानी कहा जाता है, यह खेल की महत्वपूर्ण गोटी होती है.    

पाउडर – कैरम के उपयोग के साथ-साथ बोर्ड की चिकनी सतह खुरदरी हो जाती है जिसकी वजह से गोटिया आसानी से फिसलती नहीं है. बोर्ड की सतह को फिर से चिकनी बनाने के लिए पाउडर का उपयोग किया जाता है.  

कैरम खेलने के नियम

कैरम को शांतिपूर्ण और सहजता से खेलने के लिए खेल के कुछ  नियम बनाये गए है जिनका पालन करना आवश्यक होता है – 

1. स्ट्राइकर  को हमेशा दोनों लाइन को छूते हुए रखना होता है अगर स्ट्राइकर केवल एक  लाइन को ही छूता है तो फ़ाउल  माना जाता है और खिलाड़ी की एक बारी ख़त्म हो जाती है.

2.अगर स्ट्राइकर पॉकेट में गिर जाता है या उछल कर बोर्ड से बाहर चला जाता है तो फ़ाउल माना जाता है और खिलाड़ी की बारी कट जाती है.

3. स्ट्राइकर को  उंगली से मारते समय हाथ का अन्य कोई भी हिस्सा बोर्ड या स्ट्राइकर को छूने पर फ़ाउल होता है और खिलाड़ी की एक बारी कर जाती है.

4. अगर कोई खिलाड़ी रानी को पॉकेट में गिरा लेता है तो उसको तुरंत बाद काली या सफ़ेद गोटी को गिराना  होता है अन्यथा रानी को बोर्ड के अंदर वापस रख दिया जाता है.

5. खेल के अंत में अगर एक रानी और एक-एक सफ़ेद और काली गोटी बच जाती है तो खिलाड़ी को पहले रानी को पॉकेट में डालना अनिवार्य होता है.

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निष्कर्ष   

कैरम का खेल बहुत मनोरंजक होता है इस खेल को एक बार खेल लेने के बाद भी बार खेलने की इच्छा होती है. अगर आप बोर हो रहे हो तो अपने दोस्तों या परिवार के सदस्यों साथ कैरम खेल कर अपना टाइम पास  सकते है. आप अच्छी तरह से इस  खेल को सिख कर इस खेल में होने वाली विभिन्न प्रतियोगिता में हिस्सा भी ले सकते है. खेल को खेलने के लिए यूनिफार्म अथवा अभ्यास की भी आवश्यकता नहीं होती है. 

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