कोरोना काल में जीवन में चुनौती पर निबंध

मनुष्य को अपने जीवन में बहुत सारी चुनौतियों का सामना करना होता है और ये चुनौतियां मनुष्य को जीवन में बहुत कुछ सीखा कर जाती है. वैसे तो आये दिन बाढ़, भूकम्प, सूनामी जैसी प्राकृतिक आपदाओं के कारण मनुष्य के जीवन में कई चुनौतियां आती रहती है लेकिन कोरोना महामारी के कारण जो चुनौतियां उत्पन्न हुई उन्होंने लोगों को बहुत ज्यादा और लम्बे समय तक प्रभावित किया. कोरोना महामारी के दौरान मनुष्य को शारीरिक, मानसिक, आर्थिक, सामाजिक आदि चुनौतियों का सामना करना पड़ा. 

इस महामारी ने दुनिया के लगभग हर देश को प्रभावित किया है और लाखों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी. इस दौरान सबसे बड़ी चुनौती का सामना देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को करना पड़ा. इस प्रकार की चुनौतियां लोगों को कमजोर करने की कोशिश करती है. इनसे बाहर निकलना बहुत ही मुश्किल होता है और बहुत समय लग जाता है. इस लेख में कोरोना काल में जीवन में चुनौती पर निबंध लिखा गया है जो हर कक्षा के विद्यार्थियों के लिए उपयोगी है.

कोरोना काल में जीवन में चुनौती पर निबंध

कोरोना काल में जीवन में चुनौती पर निबंध   

कोरोना वायरस एक ऐसी बीमारी है जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के अंदर बहुत जल्दी फैलती है और उस व्यक्ति के श्वसन तंत्र को बहुत बुरे तरीके से प्रभावित करती है. बहुत तेजी से लोगों के बीच फ़ैल रहे इस वायरस के संक्रमण को देखते हुए ही इसे विश्व स्वास्थ्य संघठन के द्वारा वैश्विक महामारी घोषित किया गया था. उसके बाद दुनिया के हर देश ने अपने स्तर पर एक्शन लेकर पूरे देश में सम्पूर्ण लॉकडाउन लगाया गया.

कोरोना वायरस महामारी से लड़ने के लिए दुनिया के अलग-अलग देशों ने वैक्सीन का आविष्कार कर दिया क्योंकि वैक्सीन ही इस महामारी से लोगों की जान को सुरक्षित रख सकती है. इसके बाद कई देशों ने कोरोना वैक्सीन को सफलता पूर्वक लॉन्च कर दिया और भारत ने भी अपने देश में स्वदेशी वैक्सीन निर्मित की और बहुत जल्दी लोगों का टीकाकरण शुरू किया.

कोरोना वायरस एक नई बीमारी है जिसके बारे में लोगों को पहले कोई जानकारी नहीं थी इसलिए कई लोग इस बीमारी के प्रति लापरवाही बरतने लगे. लोगों को जागरूक करने और इस बीमारी से अपने आप को सुरक्षित रखने के लिए सरकार के द्वारा विभिन्न अभियान भी चलाए गए.

कोरोना काल में जीवन में चुनौतियां 

स्वास्थ्य सम्बंधित चुनौतियां

इस महामारी में सबसे अधिक दबाव देश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ा. लोगों के बीच इस बीमारी का संक्रमण इतना तेजी से फैला कि एक साथ कई मरीज अस्पताल में आने लगे जिसके परिणामस्वरूप अस्पताल में बेड, ऑक्सीजन, दवाइयाँ, डॉक्टर आदि की कमी होने लगी.

2021 में कोरोना की दूसरी लहर आने से देश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर इतिहास का सबसे बड़ा संकट आया. इस दौरान देश में लाखों लोग संक्रमित हुए जिससे ऑक्सीजन गैस की कमी हो गयी. कई ऐसे मरीज थे जिनकी जान केवल ऑक्सीजन की कमी से गयी अगर उनको सही वक्त पर ऑक्सीजन मिल जाती तो उनकी जान बच सकती थी.

आर्थिक चुनौतियां

कोरोना ने लोगों के स्वास्थ्य के साथ-साथ उनकी आर्थिक स्थिति को भी प्रभावित किया. इस बीमारी से संक्रमित लोगों को इलाज के लिए काफी पैसा खर्च करना पड़ा और ये पैसे वही लोग खर्च कर पाते है जो आर्थिक रूप से सक्षम होते है. एक गरीब व्यक्ति के लिए प्राइवेट हॉस्पिटल में जाकर पैसे खर्च करना संभव नहीं होता. 

लॉकडाउन लगने से लोगों के व्यापर बंद हो गए और कई लोगों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा. देश के ऐसे गरीब लोग जो रोजाना मजदूरी करके अपने परिवार का गुज़ारा करते थे उनका काम बंद हो गया. काम बंद होने के बाद मजदूरों को अपने परिवार के लिए भोजन पानी की व्यवस्था करने में भी बहुत सारी चुनौतियों का सामना करना पड़ा.   

भारत की अर्थव्यवस्था बहुत बुरे तरीके से प्रभावित हुई और ऐसा केवल भारत में ही नहीं हुआ बल्कि दुनिया के बहुत सारे देशों की अर्थव्यवस्था में भी भारी गिरावट हुई. अमेरिका और रूस जैसे दुनिया के विकसित देश भी अर्थव्यवस्था के नकारत्मक प्रभाव से नहीं बच पाए. आज़ादी के बाद भारत में पहली बार ऐसा हुआ है कि देश की जीडीपी नेगेटिव अंको के साथ सबसे नीचले स्तर पर पहुँच गयी.

शिक्षा सम्बंधित चुनौतियां

कोरोना में छात्रों की पढ़ाई पर भी बहुत असर पड़ा. स्कूल और कॉलेज बंद होने कारण बच्चों को बिना परीक्षा लिए ही पास कर दिया गया जो किसी भी प्रकार से सही नहीं है. जिन बच्चों ने परीक्षा में अच्छे अंक लाने के लिए पूरे साल मेहनत करके पढाई की उन बच्चों की मानसिकता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा.

शिक्षा व्यवस्था को बिना किसी तैयारी के ऑनलाइन कर दिया गया जिसके कारण गरीब बच्चों को  संसाधनों के अभाव के कारण ऑनलाइन पढाई करने में बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. ग्रामीण इलाकों में रहने वाली लड़कियों को अब पढ़ाई छोड़ने और बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों का सामना करना पड़ सकता है जो महिला सशक्तिकरण के लिए बहुत बड़ी चुनौती हो सकती है.

सामाजिक चुनौतियां

‘आपस में दूरी और मास्क है जरुरी’ के इस नारे ने कहीं लोगों के बीच वास्तविक दूरी तो पैदा नहीं कर दी है? यह भी विचार करने वाला विषय है. कोरोना के कारण संक्रमित होने के बाद उस व्यक्ति के परिजन को उससे दूर रहना पड़ता है और व्यक्ति की मृत्यु होती है तो उसके परिजनों को उसका अंतिम संस्कार करने का भी मौका नहीं मिलता.

किसी भी पुरुष या महिला के जीवन में उसकी शादी से बड़ा खुशी का अवसर और कोई नहीं होता है. कोरोना काल में शादी समारोह पर भी रोक लग गयी और ऐसे में शादी में शामिल होने के लिए दूल्हा दुल्हन के अलावा और कोई नहीं था. 

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निष्कर्ष

मनुष्य जीवन में चुनौतियां उसके धैर्य और क्षमता की परीक्षा लेने के लिए ही आती है और जो इन चुनौतियों का डट कर सामना करते है वो अपने जीवन में कभी हार नहीं मानते है. कोरोना काल में किसी ने अपना बिज़नेस खोया, किसी ने अपनी नौकरी खोई, किसी ने अपने परिवार को खोया लेकिन कोरोना से हार मान लेना किसी भी प्रकार से सही नहीं है.

अगर जीवन में कुछ खोया है तो वापस जीरो से शुरुआत करके अब और भी बेहतर कर दिखाने का समय है. लोगों को अपने अंदर की इंसानियत को जीवित रखते हुए इस महामारी में जरुरत मंद लोगों की मदद करनी चाहिए ताकि वो भी इस महामारी से अपने आप को और अपने परिवार को सुरक्षित रख सके.

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