राष्ट्रीय एकता

राष्ट्रीय एकीकरण एक मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया और एक भावना है जो किसी राष्ट्र या देश के लोगों के बीच भाईचारे या प्रेम और राष्ट्र के प्रति अपनेपन की भावना और प्रशंसा को दर्शाता है।

राष्ट्रीय एकता राष्ट्र को मजबूत और एकजुट बनाती है। राष्ट्रीय एकता स्वतंत्रता की भावना है और हम सभी उस विश्वास को रख सकते हैं जो विभिन्न धर्मों, संप्रदायों, जाति, पहनावे, सभ्यता और संस्कृति के लोगों को एक सूत्र में बांधे रखता है। अनेक मतभेदों के बावजूद सभी एक दूसरे के साथ मिलजुल कर रहते हैं।

हमें हमारे देश पर गर्व है। यहां अनेक जातियों और संप्रदायों के लोग, जिनका रहन-सहन, खान-पान और पहनावा बिल्कुल अलग है, एक साथ रहते हैं। सभी राष्ट्रीय एकता के एक सूत्र में पिरोए हुए हैं

लोगों की एकता महान है तो हमारा देश महान बनता है। इन परिस्थितियों में कोई भी बाहरी व्यक्ति इस राष्ट्र और सार्वभौमिकता को प्रभावित नहीं कर सकता है, लेकिन जब भी राष्ट्रीय एकता खंडित होती है, तो उसे कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। यदि हम अपने ही इतिहास के पन्ने पलटें तो पाते हैं कि जब-जब हमारी राष्ट्रीय एकता कमजोर हुई है, बाहरी ताकतों ने उसका फायदा उठाया है और हमें उन्हीं के अधीन रहना पड़ा है।

एकता ही एक ऐसी चीज है जिसने हमें वर्षों की कैद से मुक्त कराया इसलिए किसी भी राष्ट्र की एकता, अखंडता और सार्वभौमिकता को बनाए रखने के लिए राष्ट्रीय एकता का होना आवश्यक है। वर्षों से गुलामी का शिकार रहे भारत जैसे विकासशील देश के लिए राष्ट्रीय एकता की संपूर्ण कड़ी को मजबूत करना बहुत जरूरी है ताकि भविष्य में इसकी पुनरावृत्ति न हो।

देश में व्याप्त सांप्रदायिकता, जातिवाद, भाषावाद, क्षेत्रीयता आदि सभी राष्ट्रीय एकता के अवरोधक तत्व हैं । ये सभी अवरोधक तत्व राष्ट्रीय एकता की कड़ी को कमजोर बनाते हैं । इन अवरोधक तत्वों के प्रभाव से ग्रसित लोगों की मानसिकता क्षुद्र होती है जो निजी स्वार्थ के चलते स्वयं को राष्ट्र की प्रमुख धारा से अलग रखते हैं तथा अपने संपर्क में आए अन्य लोगों को भी अलगाववाद के लिए उकसाते हैं । यही आगे चलकर लोगों में विघटन का रूप लेता है जो फिर खून-खराबे, मारकाट व दंगों आदि में परिवर्तित हो जाता है ।

आजादी से पहले विदेशियों ने हमारी एकता को तोड़ने और एक दूसरे से अलग करने की कोशिश की। हमारे देश की भौगोलिक विविधता, जिसमें कई क्षेत्र और उनमें रहने वाली कई जातियां और समुदाय शामिल हैं, ये सभी आपसी राष्ट्रीय एकता को कमजोर बनाते हैं। इस प्रकार ये विविधताएं जो हमारी संस्कृति की शान हैं जब उग्र रूप धारण कर लेती हैं तो हमारी एकता और अखंडता में बाधक बन जाती हैं।

कुछ देश अभी भी इस एकता को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं और हमारी स्वतंत्रता और शांति को खतरे में डाल रहे हैं। जो देश हमारी स्वतंत्रता और प्रगति से जलते हैं वे हमेशा इसे नष्ट करने की कोशिश करते हैं। कश्मीर की हमारी समस्या इन्हीं प्रयासों की देन है जिससे हमारे देश के बहुत से युवा देश की मुख्य धारा से भटक गए हैं और अलग हो गए हैं।

राष्ट्रीय एकता व इसकी अक्षुण्णता बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि राष्ट्रीय एकता के तत्वों; जैसे हमारी राष्ट्रभाषा, संविधान, राष्ट्रीय चिह्‌नों, राष्ट्रीय पर्व व सामाजिक समानता तथा उसकी उत्कृष्टता पर विशेष ध्यान दें । उन सच्चे व महान देशभक्तों की गाथाओं को उजागर करें जिन्होंने राष्ट्र की स्वतंत्रता व सार्वभौमिकता बनाए रखने के लिए अपने प्राण तक न्यौछावर कर दिए । महापुरुषों के आदर्शों पर चलना व उनके बताए मार्ग का अनुसरण करना भी राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देता है ।

राष्ट्रीय एकता को संबल प्रदान करने वाले तत्व कम नहीं हैं, बस उन्हें समय-समय पर अपने जीवन में आत्मसात् करने की आवश्यकता है । विभिन्न राष्ट्रीय दिवसों पर होने वाली गोष्ठियाँ, विचार-विमर्श आदि के माध्यम से राष्ट्र की एकता को बल मिलता है ।

विभिन्न संगीत सम्मेलनों, समवेत् गान, सांस्कृतिक कार्यक्रमों आदि के माध्यम से जनता के बीच एकता को बढ़ावा देनेवाला संदेश जाता है । सबसे बढ़कर आवश्यक यह है कि हम निजी रूप से ऐसा प्रयास जारी रखें जिससे देश की एकता को बल मिले ।

भारत एक महान, स्वतंत्र एवं प्रगतिशील राष्ट्र है । राष्ट्रीय एकता बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि हम अपनी क्षुद्र मानसिकता से स्वयं को दूर रखें तथा इसमें बाधक समस्त तत्वों का बहिष्कार करें । हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि हम चाहे जिस क्षेत्र, प्रांत, जाति या समुदाय के हैं परंतु उससे पूर्व हम भारतीय नागरिक हैं । भारतीयता ही हमारी वास्तविक पहचान है । अत: हम कभी भी ऐसे कृत्य न करें जो हमारे देश के गौरव व उसकी प्रगति में बाधा डालते हों ।

हम स्वयं अपने राष्ट्रीय प्रतीकों व अपने संविधान का सम्मान करें तथा अपने संपर्क में आने वाले समस्त व्यक्तियों को भी इसके लिंए प्रेरित करें जिससे हमारी राष्ट्रीय एकता युग-युगांतर तक बनी रहे । हम विघटनकारी तत्वों को राष्ट्रीय एकता की मशाल जलाकर ही भस्मीभूत कर सकते हैं । हम एक थे एक हैं और सदा एक बने रहेंगे, जैसे-जैसे यह विश्वास दृढ़ होता जाएगा हमारी राष्ट्रीय एकता त्यों-त्यों मजबूत होती जाएगी ।

By admin

A professional blogger, Since 2016, I have worked on 100+ different blogs. Now, I am a CEO at Speech Hindi...

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